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भारत में ग्रामीण समाज की समस्याएं एवं विशेषताएं
Author Name : डॉ. रूकमणी मीणा
शोध सारांश
भारत गाँवो का देश है, और सही भी यही है क्योंकि यहाँ की अधिक्तर जनसंख्या गाँवो में वास करती है। भारत वासी अपने विकास के लिए भारतीय कृषि पर ही निर्भर करते है। सादा जीवन उच्च विचार यही भारतीय ग्रामों की पहचान है। जब भी मन में भारतीय ग्राम का विचार आता है, तो खेतों में दूर-दूर तक लहलहाती हुई हरी फसले, कड़ी धूप और खुले आसमान के नीचे काम करता किसान, घरो की बागड़ोर संभालती घर की स्त्रियों की छवि आखों के सामने आ जाती है। पेड़ों की ताजी हवा, ताजा और शुध्द दूध, रसायनो से मुक्त ताजी-ताजी सब्जियाँ, गाँवो के चौपालों की रौनक आदि वस्तुएं आज भी भारत वासियों को गाँव की ओर खींच ले जाती है। सभी ग्राम वासियों का एक दूसरे के लिए लगाव, उनका एक दूसरे की मदद के लिए सदैव तत्पर रहना गावों की विशेषता है। अगर हम ग्रामीण जीवन की बात करे, तो सबसे पहला प्रश्न यह उठता है कि आखिर गाँव है क्या ? तो जवाब में, मै आपको बताना चाहूंगी कि जब कुछ लोगों का एक समुह एक निश्चित छोटे स्थान या बस्ती में रहता है, उसे गाँव कहते है। गाँव के लोग अपने जीवन यापन के लिए कृषि या अन्य पारंपरिक उद्योगो पर निर्भर करते है। और यहाँ इन गाँवों में शहरों की अपेक्षा कम सुविधाये और संसाधन उपलब्ध होते है। पहले के समय में जब सुख सुविधाएँ एवं संसाधन नहीं हुआ करते थे तो सारे लोग बिना छोटी सी बस्ती या स्थान पर रहा करते थे । उसे गाँव कहा जाता है. धीरे धीरे जब दुनिया में लोगों ने एक के बाद एक अनुसंधान करते हुए विकास सुविधाओं को उत्पन्न किया और उसका लगातार विकास किया तो फिर शहर की उत्पत्ति हुई किन्तु आज भी कुछ जगह ऐसी है जहाँ पर यह सुविधाएँ नहीं पहुंच पाई है । इसलिए आज भी दुनिया है कई गांव मौजूद है । गाँव में रहने वाले लोगों का जीवन बहुत ही साधारण होता है. उनका पूरा जीवन कृषि या उससे संबंधित उद्योगों पर निर्भर करता है ।
मुख्य बिन्दु:- मानव समाज का विकास , ग्रामीण समाजशास्त्र , ग्रामीण समाज की स्थिति , विशेषताएं , लाभ एवं सुझाव ।