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ग्रामीण विकास योजनाओं में सामाजिक लेखा-जोखा की भूमिका
Author Name : अमित कुमार
DOI: https://doi.org/10.56025/IJARESM.2026.1403260041
सारांश भारत जैसे विशाल और विविधताओं से भरे लोकतांत्रिक देश में ग्रामीण क्षेत्रों का विकास राष्ट्रीय प्रगति की रीढ़ माना जाता है। देश की बड़ी आबादी गाँवों में निवास करती है, इसलिए ग्रामीण विकास योजनाएँ समाज के सबसे निचले स्तर यानी गरीब, वंचित और जरूरतमंद तबके तक पहुँचकर उनके जीवन स्तर को सुधारने का प्रयास करती हैं। सरकार द्वारा चलाई जाने वाली योजनाएँ जैसे मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन आदि ग्रामीण विकास की संरचना को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हालाँकि, इन योजनाओं का वास्तविक लाभ तब ही मिल सकता है जब वे पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और सही तरीके से क्रियान्वित हों। लेकिन व्यवहार में कई चुनौतियाँ सामने आती हैं जैसे भ्रष्टाचार, अपारदर्शिता, फर्जी लाभार्थियों की सूची, कार्यों की अधूरी गुणवत्ता तथा संसाधनों का दुरुपयोग। इन सभी समस्याओं को दूर करने और योजनाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए आवश्यक है कि जनता स्वयं निगरानी की प्रक्रिया में शामिल हो। इस संदर्भ में सामाजिक लेखा-जोखा एक अत्यंत प्रभावी और आवश्यक उपकरण है।1