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ISSN: 2455-6211

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मुंशी प्रेमचंद क...

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मुंशी प्रेमचंद क...

मुंशी प्रेमचंद के साहित्य में सामाजिक चेतना और आज का भारतीय समाज : एक तुलनात्मक एवं दार्शनिक अध्ययन

Author Name : अनीता खरे

DOI: https://doi.org/10.56025/IJARESM.2026.1403260095

 

सार हिंदी कथा-साहित्य में मुंशी प्रेमचंद का स्थान सामाजिक यथार्थवाद और मानवतावादी दृष्टि के कारण अत्यंत विशिष्ट है। उन्होंने औपनिवेशिक भारत के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अंतर्विरोधों को कथा के माध्यम से न केवल चित्रित किया, बल्कि उनका नैतिक विश्लेषण भी प्रस्तुत किया। कृषक-शोषण, स्त्री-असमानता, जातिगत दमन, मध्यवर्गीय नैतिक संकट और राष्ट्रीय पुनर्जागरण जैसे प्रश्न उनके साहित्य के केंद्रीय विषय रहे हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र में प्रेमचंद के प्रमुख उपन्यासों और कहानियों का विस्तृत पुनर्पाठ करते हुए उनकी सामाजिक चेतना की तुलना समकालीन भारतीय समाज की स्थितियों से की गई है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि यद्यपि समय बदल गया है, परंतु संरचनात्मक विषमताएँ, आर्थिक असंतुलन, लैंगिक अन्याय, जातिगत विभाजन और उपभोक्तावादी दबाव आज भी विभिन्न रूपों में विद्यमान हैं। इस प्रकार प्रेमचंद का साहित्य केवल ऐतिहासिक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि वर्तमान के नैतिक पुनर्मूल्यांकन का आधार भी है।