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योग दर्शन का वर्त...

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योग दर्शन का वर्त...

योग दर्शन का वर्तमान शिक्षा प्रणाली में प्रासंगिकता

Author Name : श्रीमती बबीता खाती, श्रीमती (डाॅ0) भीमा मनराल


सारांश

भारतीय संस्कृति का इतिहास अत्यन्त विस्तृत एवं सार्वगर्भित है। भारत भूमि अनेक ऋषियों की कर्मस्थली एवं शरणस्थली रही है। जो समय एवं काल के अनुसार हमारे देश को समृद्व बनाते रहे हैं। योगदर्शन के प्रवर्तक महर्षि पतंजलि ने शिक्षा को एक दार्शनिक एवं मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया माना है। पतंजलि ने आत्मनिरोध का आत्म नियंत्रण द्वारा आध्यात्मिक या सांसारिक विकास की प्रक्रिया को शिक्षा कहा। महर्षि पतंजलि ने अपने योग एवं शैक्षिक दर्शन से देश को ही नही बल्कि विश्व को भी एक नयी गति प्रदान की है। योग दर्शन मनोवैज्ञानिक आधार पर पाठयक्रम निर्माण पर बल देता है जिसके अन्तर्गत बालक के विकास को आधार बनाया गया है। योग के माध्यम से विभिन्न शारीरिक, मानसिक, भावात्मक पीड़ा पर काफी हद तक विजय प्राप्त की जा सकती है। विद्यालय के सम्बन्ध में योग दर्शन प्राकृतिक वातावरण से सुसज्जित स्थान पर विद्यालय के होने के पक्ष में हैं, जहाँ बालकों का विकास प्रकृति की गोद में होता ळें