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महाभारत में पर्य...

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महाभारत में पर्य...

महाभारत में पर्यावरणीय आचार: मानव -प्रकृति के सम्बन्ध मेें

Author Name : डॉ0 पूनम


‘पर्यावरण’ शब्द एवं उसका अर्थ अत्यन्त व्यापक है, जिसमें सारा ब्रह्माण्ड ही समा जाता है। परि -अर्थात हमारे चारों ओर तथा आवारण-अर्थात् ढकना ही पर्यावरण है। मनुष्य जगत और यह ससांर - आकाश, वायु, जल, पृथ्वी, अग्नि (सूर्य) तथा वन, वृक्ष, नदी, पहाड़, समुद्र एंव पशु पक्षी आदि से आवृत है। उपर्यक्त समस्त तत्वों तथा पदार्थाे का समग्र रूप अथवा समुद्रित रूप जो पर्यावरण है, उसी में सब पैदा होते है, जीवित रहते है, सांस लेते है, फलते-फूलते हैं और अपने समस्त कार्यकलाप करते हैं। ये सभी घटक कहे जाते है। ये सभी अर्थ जितने उन्नत व श्रेष्ठ होगें उतना ही श्रेष्ठ मानव पर्यावरण भी होगा।